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सुनन नसाई

नंबर 2860

नंबर 2860किताब 24, नंबर 243
أَخْبَرَنَا حُمَيْدُ بْنُ مَسْعَدَةَ الْبَصْرِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، - وَهُوَ ابْنُ حَبِيبٍ - عَنِ الْحَجَّاجِ الصَّوَّافِ، عَنْ يَحْيَى بْنِ أَبِي كَثِيرٍ، عَنْ عِكْرِمَةَ، عَنِ الْحَجَّاجِ بْنِ عَمْرٍو الأَنْصَارِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ مَنْ عَرِجَ أَوْ كُسِرَ فَقَدْ حَلَّ وَعَلَيْهِ حَجَّةٌ أُخْرَى ‏"‏ ‏.‏ فَسَأَلْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ وَأَبَا هُرَيْرَةَ عَنْ ذَلِكَ فَقَالاَ صَدَقَ ‏.‏
It was narrated from Ikrimah, from Al-Hajjaj bin Amr Al-Ansari that:he heard the Messenger of Allah say "Whoever suffers a leg injury of breaks his leg, he has exited Ihram, but he has to perform another Hajj." I asked Ibn Abbas and Abu Hurarirah about that and he said "He spoke the truth
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।