सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2847

नंबर 2847किताब 24, नंबर 230
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، عَنْ سُفْيَانَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، قَالَ سَمِعْتُ عَطَاءً، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عَبَّاسٍ، يَقُولُ احْتَجَمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏ ثُمَّ قَالَ بَعْدُ أَخْبَرَنِي طَاوُسٌ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ يَقُولُ احْتَجَمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏
It was narrated that Ibn Abbas said:"Prophet was treated by means of cupping when he was in Ihram." (Diaf) Chpater 93. Cupping To Treat The Muhrim For A Disease he Is Suffering From
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।