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सुनन नसाई

नंबर 2837

नंबर 2837किताब 24, नंबर 220
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا دَاوُدُ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ الْعَطَّارُ - عَنْ عَمْرٍو، - وَهُوَ ابْنُ دِينَارٍ - قَالَ سَمِعْتُ أَبَا الشَّعْثَاءِ، يُحَدِّثُ عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، قَالَ تَزَوَّجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مَيْمُونَةَ وَهُوَ مُحْرِمٌ ‏.‏
It was narrated that Ibn Abbas said:"The Prophet married Maimunah when he was in Ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • ShadhAbu Ghuddah
  • ShadhAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।