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सुनन नसाई

नंबर 2810

नंबर 2810किताब 24, नंबर 192
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، وَمُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالاَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الْوَارِثِ بْنَ أَبِي حَنِيفَةَ، قَالَ سَمِعْتُ إِبْرَاهِيمَ التَّيْمِيَّ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، عَنْ أَبِي ذَرٍّ، قَالَ فِي مُتْعَةِ الْحَجِّ لَيْسَتْ لَكُمْ وَلَسْتُمْ مِنْهَا فِي شَىْءٍ إِنَّمَا كَانَتْ رُخْصَةً لَنَا أَصْحَابَ مُحَمَّدٍ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated that Abu Dharr said concerning Tamattu' in Hajj:it is not for you, and you have nothing to do with it; it was only for us, the Companions of Muhammad
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih MuqufAbu Ghuddah
  • Sahih MuqufAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।