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सुनन नसाई

नंबर 2804

नंबर 2804किताब 24, नंबर 186
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ يَحْيَى، عَنْ عَمْرَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لاَ نُرَى إِلاَّ أَنَّهُ الْحَجُّ فَلَمَّا دَنَوْنَا مِنْ مَكَّةَ أَمَرَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَنْ كَانَ مَعَهُ هَدْىٌ أَنْ يُقِيمَ عَلَى إِحْرَامِهِ وَمَنْ لَمْ يَكُنْ مَعَهُ هَدْىٌ أَنْ يَحِلَّ ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"We went out with the Messenger of Allah not thinking of anything but Hajj. When we drew close to Makkah, the Messenger of Allah ordered: 'Whoever has a Hadi with him should remain in Ihram, and whoever does not have a Hadi with him, he should exit Ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।