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सुनन नसाई

नंबर 2797

नंबर 2797किताब 24, नंबर 179
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ قُدَامَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا جَرِيرٌ، عَنْ مَنْصُورٍ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ لَقَدْ رَأَيْتُنِي أَفْتِلُ قَلاَئِدَ هَدْىِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مِنَ الْغَنَمِ فَيَبْعَثُ بِهَا ثُمَّ يُقِيمُ فِينَا حَلاَلاً ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"I remember twisting the garlands for the sacrificial sheep of the Messenger of Allah, then he sent them and stayed with us as a non-Muhrim (not in a state of Ihram)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।