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सुनन नसाई

नंबर 2795

नंबर 2795किताब 24, नंबर 177
أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ سَمِعْتُ عَبْدَ الرَّحْمَنِ بْنَ الْقَاسِمِ، يُحَدِّثُ عَنْ أَبِيهِ، قَالَ قَالَتْ عَائِشَةُ كُنْتُ أَفْتِلُ قَلاَئِدَ هَدْىِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَلاَ يَجْتَنِبُ شَيْئًا وَلاَ نَعْلَمُ الْحَجَّ يُحِلُّهُ إِلاَّ الطَّوَافُ بِالْبَيْتِ ‏.‏
Aishah said:"I used to twist the garlands for the Hadi of the Messenger of Allah. Then he would not avoid anything." She said "We do not know that the pilgrim may exit Ihram fully except by performing Tawaf
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।