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सुनन नसाई

नंबर 2792

नंबर 2792किताब 24, नंबर 174
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ أَبِي الزُّبَيْرِ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّهُمْ كَانُوا إِذَا كَانُوا حَاضِرِينَ مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم بِالْمَدِينَةِ بَعَثَ بِالْهَدْىِ فَمَنْ شَاءَ أَحْرَمَ وَمَنْ شَاءَ تَرَكَ ‏.‏
It was narrated from Jabir:That when they were present with the Messenger of Allah in Al-Madinah, he sent the Hadi, and whoever wanted to enter Ihram did so, and whoever did not want to, did not
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।