सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2790

नंबर 2790किताब 24, नंबर 172
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ عِيسَى، - ثِقَةٌ - قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الصَّمَدِ بْنُ عَبْدِ الْوَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبِي، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ جُحَادَةَ، ح وَأَنْبَأَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ بْنُ عَبْدِ الصَّمَدِ بْنِ عَبْدِ الْوَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو مَعْمَرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَارِثِ، قَالَ أَنْبَأَنَا مُحَمَّدُ بْنُ جُحَادَةَ، عَنِ الْحَكَمِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ كُنَّا نُقَلِّدُ الشَّاةَ فَيُرْسِلُ بِهَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حَلاَلاً لَمْ يُحْرِمْ مِنْ شَىْءٍ ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"We used to garland the sheep, then the Messenger of Allah would send it, and he would not enter a state of Ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।