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सुनन नसाई

नंबर 2780

नंबर 2780किताब 24, नंबर 162
أَخْبَرَنَا الْحَسَنُ بْنُ مُحَمَّدٍ الزَّعْفَرَانِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ، - يَعْنِي ابْنَ حَسَنٍ - عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنِ الْقَاسِمِ، عَنْ أُمِّ الْمُؤْمِنِينَ، قَالَتْ أَنَا فَتَلْتُ، تِلْكَ الْقَلاَئِدَ مِنْ عِهْنٍ كَانَ عِنْدَنَا ثُمَّ أَصْبَحَ فِينَا فَيَأْتِي مَا يَأْتِي الْحَلاَلُ مِنْ أَهْلِهِ وَمَا يَأْتِي الرَّجُلُ مِنْ أَهْلِهِ ‏.‏
It was narrated from Al-Qasim that the Mother of the Believers said:"I twisted those garlands from wool that we had, then the following morning he did what any non-Muhrim does with his wife, what any man does with his wife
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।