सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2777

नंबर 2777किताब 24, नंबर 159
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنَا عَامِرٌ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنْ كُنْتُ لأَفْتِلُ قَلاَئِدَ هَدْىِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ثُمَّ يُقِيمُ وَلاَ يُحْرِمُ ‏.‏
It was narrated that Aishah said:"I used to twist the garlands of the Hadi of the Messenger of Allah, then he would stay with his family and not enter Ihram
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।