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सुनन नसाई

नंबर 2765

नंबर 2765किताब 24, नंबर 147
أَخْبَرَنَا هَارُونُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا حَبِيبٌ، عَنْ عَمْرِو بْنِ هَرِمٍ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، وَعِكْرِمَةُ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ، أَنَّ ضُبَاعَةَ، أَرَادَتِ الْحَجَّ فَأَمَرَهَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم أَنْ تَشْتَرِطَ فَفَعَلَتْ عَنْ أَمْرِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏.‏
It was narrated from Ibn 'Abbas:That Duba'ah wanted to perform Hajj, so the Prophet Told here to stipulate a condition, and she acted upon the command of the Messenger of Allah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।