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सुनन नसाई

नंबर 2753

नंबर 2753किताब 24, नंबर 135
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ خَلاَّدِ بْنِ السَّائِبِ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ جَاءَنِي جِبْرِيلُ فَقَالَ لِي يَا مُحَمَّدُ مُرْ أَصْحَابَكَ أَنْ يَرْفَعُوا أَصْوَاتَهُمْ بِالتَّلْبِيَةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Khallad bin As-Sa'ib, from his father that the Messenger of Allah said:"Jibril came to me and said: 'O Muhammad! Tell your Companions to rise their voices when reciting the Talbiyah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।