सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2749

नंबर 2749किताब 24, नंबर 131
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ مَالِكٍ، عَنْ نَافِعٍ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عُمَرَ، قَالَ تَلْبِيَةُ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَبَّيْكَ اللَّهُمَّ لَبَّيْكَ لَبَّيْكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ لَبَّيْكَ إِنَّ الْحَمْدَ وَالنِّعْمَةَ لَكَ وَالْمُلْكَ لاَ شَرِيكَ لَكَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Abdullah bin 'Umar said:"The Talbiyah of the Messenger of Allah was: "Labbaika Allahumma Labbaik, Labbaika la sharika laka labbaik. Innal-hamda wan-ni'mata laka wal-mulk, la sharika lak (Here I am, O Allah, here I am. Here I am, You have no partner, here I am. Verily all praise and blessings are Yours, and all sovereignty, You have no partner)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।