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सुनन नसाई

नंबर 2744

नंबर 2744किताब 24, नंबर 126
أَخْبَرَنِي عِمْرَانُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ عَطَاءٌ قَالَ جَابِرٌ قَدِمَ عَلِيٌّ مِنْ سِعَايَتِهِ فَقَالَ لَهُ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ بِمَا أَهْلَلْتَ يَا عَلِيُّ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ بِمَا أَهَلَّ بِهِ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏.‏ قَالَ ‏"‏ فَاهْدِ وَامْكُثْ حَرَامًا كَمَا أَنْتَ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ وَأَهْدَى عَلِيٌّ لَهُ هَدْيًا ‏.‏
Jabir said:"Ali came from collecting Zakah and the Prophet said to him: "For what have you entered Ihram, O 'Ali?' he said: 'For that for which the Messenger of Allah entered Ihram.' He said: 'Then offer the Hadi and remain in Ihram as you are.' So 'Ali offered a Hadi
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।