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सुनन नसाई

नंबर 2739

नंबर 2739किताब 24, नंबर 121
أَخْبَرَنِي إِبْرَاهِيمُ بْنُ يَعْقُوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ عُمَرَ، قَالَ حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مُسْلِمٍ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ وَاسِعٍ، عَنْ مُطَرِّفٍ، قَالَ قَالَ لِي عِمْرَانُ بْنُ حُصَيْنٍ إِنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَدْ تَمَتَّعَ وَتَمَتَّعْنَا مَعَهُ قَالَ فِيهَا قَائِلٌ بِرَأْيِهِ ‏.‏
It was narrated that Mutarrif said:"Imran bin Husain said to me; 'The Messenger of Allah performed 'Umrah and Hajj together, and we performed 'Umrah and Hajj together with him, and whoever says anything different, that is his own personal opinion
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।