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सुनन नसाई

नंबर 2729

नंबर 2729किताब 24, नंबर 111
أَخْبَرَنَا مُجَاهِدُ بْنُ مُوسَى، عَنْ هُشَيْمٍ، عَنْ يَحْيَى، وَعَبْدِ الْعَزِيزِ بْنِ صُهَيْبٍ، وَحُمَيْدٍ الطَّوِيلِ، ح وَأَنْبَأَنَا يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا هُشَيْمٌ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الْعَزِيزِ بْنُ صُهَيْبٍ، وَحُمَيْدٌ الطَّوِيلُ، وَيَحْيَى بْنُ أَبِي إِسْحَاقَ، كُلُّهُمْ عَنْ أَنَسٍ، سَمِعُوهُ يَقُولُ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ لَبَّيْكَ عُمْرَةً وَحَجًّا لَبَّيْكَ عُمْرَةً وَحَجًّا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Anas said:"I heard the Messenger of Allah 'Labbaika 'Umratan wa Hajjan ma'an, Iabbaika 'Umratan wa Hajjan ma'an (Here I am (O Allah) for "Umrah and Hajj together, here I am (O Allah) for "Umrah and Hajj together
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।