सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2717

नंबर 2717किताब 24, नंबर 99
أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ حَبِيبِ بْنِ عَرَبِيٍّ، عَنْ حَمَّادٍ، عَنْ هِشَامٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ خَرَجْنَا مَعَ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مُوَافِينَ لِهِلاَلِ ذِي الْحِجَّةِ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ شَاءَ أَنْ يُهِلَّ بِحَجٍّ فَلْيُهِلَّ وَمَنْ شَاءَ أَنْ يُهِلَّ بِعُمْرَةٍ فَلْيُهِلَّ بِعُمْرَةٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"We went out with the Messenger of Allah around the time of the new moon of Dhul-Hijjah, and the Messenger of Allah said: 'Whoever wishes to enter Ihram for Hajj, let him do so , and whoever wishes to enter Ihram for 'Umrah, let him do so
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।