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सुनन नसाई

नंबर 2676

नंबर 2676किताब 24, नंबर 58
أَخْبَرَنَا أَبُو الأَشْعَثِ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ بْنُ زُرَيْعٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ نَادَى النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم رَجُلٌ فَقَالَ مَا نَلْبَسُ إِذَا أَحْرَمْنَا قَالَ ‏ "‏ لاَ تَلْبَسِ الْقَمِيصَ وَلاَ الْعِمَامَةَ وَلاَ السَّرَاوِيلَ وَلاَ الْبُرْنُسَ وَلاَ الْخُفَّيْنِ إِلاَّ أَنْ لاَ تَجِدَ نَعْلَيْنِ فَإِنْ لَمْ تَجِدِ النَّعْلَيْنِ فَمَا دُونَ الْكَعْبَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said; "A man came to the Prophet and said:'What should we wear when we enter Ihram?' He said: 'Do not wear a shirt, or an 'Imamah, or pants, or a burnouts, or Khuffs unless you cannot find any sandals. If you cannot find any sandals, then wear something that comes beneath the ankles
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।