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सुनन नसाई

नंबर 2662

नंबर 2662किताब 24, नंबर 44
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ حَدَّثَنَا النَّضْرُ، - وَهُوَ ابْنُ شُمَيْلٍ - قَالَ حَدَّثَنَا أَشْعَثُ، - وَهُوَ ابْنُ عَبْدِ الْمَلِكِ - عَنِ الْحَسَنِ، عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الظُّهْرَ بِالْبَيْدَاءِ ثُمَّ رَكِبَ وَصَعِدَ جَبَلَ الْبَيْدَاءِ فَأَهَلَّ بِالْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ حِينَ صَلَّى الظُّهْرَ ‏.‏
It was narrated from Anas bin Malik that:the Messenger of Allah prayed Zuhr in Al-Baida then he rode up the mountain of Al-Baida; and began the Talbiyah for Hajj and 'Umrah, when he had prayed Zuhr (Daif)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।