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सुनन नसाई

नंबर 2630

नंबर 2630किताब 24, नंबर 12
أَخْبَرَنَا أَبُو دَاوُدَ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَتَّابٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَزْرَةُ بْنُ ثَابِتٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ دِينَارٍ، قَالَ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ تَابِعُوا بَيْنَ الْحَجِّ وَالْعُمْرَةِ فَإِنَّهُمَا يَنْفِيَانِ الْفَقْرَ وَالذُّنُوبَ كَمَا يَنْفِي الْكِيرُ خَبَثَ الْحَدِيدِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'abbas said:"The Messenger of Allah said: 'Perform Hajj and 'Umrah consecutively; for they remove poverty and sin as the bellows removes impurity from iron
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।