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सुनन नसाई

नंबर 2628

नंबर 2628किताब 24, नंबर 10
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا جَرِيرٌ، عَنْ حَبِيبٍ، - وَهُوَ ابْنُ أَبِي عَمْرَةَ - عَنْ عَائِشَةَ بِنْتِ طَلْحَةَ، قَالَتْ أَخْبَرَتْنِي أُمُّ الْمُؤْمِنِينَ، عَائِشَةُ قَالَتْ قُلْتُ يَا رَسُولَ اللَّهِ أَلاَ نَخْرُجُ فَنُجَاهِدَ مَعَكَ فَإِنِّي لاَ أَرَى عَمَلاً فِي الْقُرْآنِ أَفْضَلَ مِنَ الْجِهَادِ ‏.‏ قَالَ ‏ "‏ لاَ وَلَكُنَّ أَحْسَنُ الْجِهَادِ وَأَجْمَلُهُ حَجُّ الْبَيْتِ حَجٌّ مَبْرُورٌ ‏"‏ ‏.‏
The Mother of the Believers, 'Aishah, said:"I said: 'O Messenger of allah, shall we not go out and fight in jihad with you, for I do not think there is any deed in the qur'an that is better than jihad.' He said: 'No. the best and most beautiful (type) of jihad is Hajj to the House; Hajj Al-Mabrur. ''(sahih)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · The Book of Hajj

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।