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सुनन नसाई

नंबर 2618

नंबर 2618किताब 23, नंबर 184
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرٌ، وَيَزِيدُ، قَالاَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ بْنُ إِسْحَاقَ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ عَتَّابَ بْنَ أَسِيدٍ أَنْ يَخْرِصَ الْعِنَبَ فَتُؤَدَّى زَكَاتُهُ زَبِيبًا كَمَا تُؤَدَّى زَكَاةُ النَّخْلِ تَمْرًا ‏.‏
It was narrated from Sa'eed bin Al-Musayyab:That the Messenger of Allah told 'Attab bin Usaid to estimate the (harvest of) grapes, and to pay Zakah in raisins, just as the Zakah on date palms is given in died dates
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan IsnaadAbu Ghuddah
  • Hasan IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।