सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2613

नंबर 2613किताब 23, नंबर 179
أَخْبَرَنَا زِيَادُ بْنُ أَيُّوبَ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ بْنُ وَاصِلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا بَهْزُ بْنُ حَكِيمٍ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ جَدِّهِ، قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِذَا أُتِيَ بِشَىْءٍ سَأَلَ عَنْهُ ‏ "‏ أَهَدِيَّةٌ أَمْ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏ فَإِنْ قِيلَ صَدَقَةٌ لَمْ يَأْكُلْ وَإِنْ قِيلَ هَدِيَّةٌ بَسَطَ يَدَهُ ‏.‏
Bahz bin Hakim narrated from his father that his grandfather said:"If something was brought to him, the prophet would ask whether it was a gift or charity. If it was said that if was charity, he would not eat, and if it was said that it was a gift, he would stretch forth his hand
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।