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सुनन नसाई

नंबर 2600

नंबर 2600किताब 23, नंबर 166
أَخْبَرَنَا مَحْمُودُ بْنُ غَيْلاَنَ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ الْمَلِكِ، عَنْ زَيْدِ بْنِ عُقْبَةَ، عَنْ سَمُرَةَ بْنِ جُنْدُبٍ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الْمَسْأَلَةُ كَدٌّ يَكُدُّ بِهَا الرَّجُلُ وَجْهَهُ إِلاَّ أَنْ يَسْأَلَ الرَّجُلُ سُلْطَانًا أَوْ فِي أَمْرٍ لاَ بُدَّ مِنْهُ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Samurah bin Jundab said:"The Messenger of Allah said: 'Begging will be but lacerations on a man's face (on the Day of Resurrection). Unless he asks a man in authority or when he has no alternative
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।