أَخْبَرَنَا هَنَّادُ بْنُ السَّرِيِّ، عَنْ أَبِي بَكْرٍ، عَنْ أَبِي حَصِينٍ، عَنْ سَالِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم " لاَ تَحِلُّ الصَّدَقَةُ لِغَنِيٍّ وَلاَ لِذِي مِرَّةٍ سَوِيٍّ " .
It was narrated that Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah said: 'It is not permissible to give charity to a rich man (or one who is independent of means) or to one who is strong and healthy
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।