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सुनन नसाई

नंबर 2590

नंबर 2590किताब 23, नंबर 156
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي ذِئْبٍ، حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ قَيْسٍ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ بْنِ مُعَاوِيَةَ، عَنْ ثَوْبَانَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ يَضْمَنْ لِي وَاحِدَةً وَلَهُ الْجَنَّةُ ‏"‏ ‏.‏ قَالَ يَحْيَى هَا هُنَا كَلِمَةٌ مَعْنَاهَا أَنْ لاَ يَسْأَلَ النَّاسَ شَيْئًا ‏.‏
It was narrated that Thawban said:"The Messenger of Allah said: 'Whoever can promise me one thing. Paradise will be his." (One of the narrators) Yahya said: "Here a statement which means: That he will not ask the people for anything
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।