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सुनन नसाई

नंबर 2587

नंबर 2587किताब 23, नंबर 153
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنْ جَعْفَرِ بْنِ رَبِيعَةَ، عَنْ بَكْرِ بْنِ سَوَادَةَ، عَنْ مُسْلِمِ بْنِ مَخْشِيٍّ، عَنِ ابْنِ الْفِرَاسِيِّ، أَنَّ الْفِرَاسِيَّ، قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَسْأَلُ يَا رَسُولَ اللَّهِ قَالَ ‏ "‏ لاَ وَإِنْ كُنْتَ سَائِلاً لاَ بُدَّ فَاسْأَلِ الصَّالِحِينَ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Ibn Al-Firasi that Al-Firasi said to the Messenger of Allah:"Shall I ask people (for help), O Messenger of Allah?" He said: "No, but if you have no alternative but to ask, then ask the righteous
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।