सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2585

नंबर 2585किताब 23, नंबर 151
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبْدِ الْحَكَمِ، عَنْ شُعَيْبٍ، عَنِ اللَّيْثِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي جَعْفَرٍ، قَالَ سَمِعْتُ حَمْزَةَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ، يَقُولُ سَمِعْتُ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ، يَقُولُ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَا يَزَالُ الرَّجُلُ يَسْأَلُ حَتَّى يَأْتِيَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ لَيْسَ فِي وَجْهِهِ مُزْعَةٌ مِنْ لَحْمٍ ‏"‏ ‏.‏
Abdullah bin 'Amr said:"The Messenger of Allah said: ' A man will keep on asking until on the Day of Resurrection he will come without even a shared of skin on his face
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।