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सुनन नसाई

नंबर 2550

नंबर 2550किताब 23, नंबर 116
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ آدَمَ، عَنْ عَبْدَةَ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ فَاطِمَةَ، عَنْ أَسْمَاءَ بِنْتِ أَبِي بَكْرٍ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لَهَا ‏ "‏ لاَ تُحْصِي فَيُحْصِيَ اللَّهُ عَزَّ وَجَلَّ عَلَيْكِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Asma' bint Abi Bakr that the Prophet said to her:"Do not count what you give, otherwise Allah, the Mighty and Sublime, will count what He gives to you
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।