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सुनन नसाई

नंबर 2540

नंबर 2540किताब 23, नंबर 106
أَخْبَرَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ الْحَارِثِ، قَالَ حَدَّثَنَا حُسَيْنٌ الْمُعَلِّمُ، عَنْ عَمْرِو بْنِ شُعَيْبٍ، أَنَّ أَبَاهُ، حَدَّثَهُ عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو، قَالَ لَمَّا فَتَحَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَكَّةَ قَامَ خَطِيبًا فَقَالَ فِي خُطْبَتِهِ ‏ "‏ لاَ يَجُوزُ لاِمْرَأَةٍ عَطِيَّةٌ إِلاَّ بِإِذْنِ زَوْجِهَا ‏"‏ ‏.‏ مُخْتَصَرٌ ‏.‏
It was narrated that 'Abdullah bin 'Amr said:"When the Messenger of Allah conquered Makkah, he stood up to address the people and said in his Khutbah; 'It is not permissible for a woman to give anything without her husband's permission."' (He narrated it) in abridged from
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Hasan SahihAbu Ghuddah
  • Hasan SahihAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।