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सुनन नसाई

नंबर 2527

नंबर 2527किताब 23, नंबर 93
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا اللَّيْثُ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ أَبِي سَعِيدٍ، وَالْقَعْقَاعِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ سَبَقَ دِرْهَمٌ مِائَةَ أَلْفِ دِرْهَمٍ ‏"‏ ‏.‏ قَالُوا وَكَيْفَ قَالَ ‏"‏ كَانَ لِرَجُلٍ دِرْهَمَانِ تَصَدَّقَ بِأَحَدِهِمَا وَانْطَلَقَ رَجُلٌ إِلَى عُرْضِ مَالِهِ فَأَخَذَ مِنْهُ مِائَةَ أَلْفِ دِرْهَمٍ فَتَصَدَّقَ بِهَا ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Hurairah that the Messenger of Allah said:"A Dirham surpassed a hundred thousand Dirhams." They said: "How?" He said: "A man had two Dirhams and gave one in charity, and another man went part of his wealth and took out a hundred thousand Dirhams and gave them in charity
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • HasanAbu Ghuddah
  • HasanAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।