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सुनन नसाई

नंबर 2524

नंबर 2524किताब 23, नंबर 90
أَخْبَرَنَا الْحُسَيْنُ بْنُ مُحَمَّدٍ الذَّارِعُ، قَالَ حَدَّثَنَا يَزِيدُ، - وَهُوَ ابْنُ زُرَيْعٍ - قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، ‏.‏ قَالَ وَأَنْبَأَنَا إِسْمَاعِيلُ بْنُ مَسْعُودٍ، قَالَ حَدَّثَنَا بِشْرٌ، - وَهُوَ ابْنُ الْمُفَضَّلِ - قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، - وَاللَّفْظُ لِبِشْرٍ - عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَبِي الْمَلِيحِ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ لاَ يَقْبَلُ صَلاَةً بِغَيْرِ طُهُورٍ وَلاَ صَدَقَةً مِنْ غُلُولٍ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Abu Al-Malib that his father said:"I heard the Messenger of Allah say: 'Allah, the Mighty and Sublime, does not accept prayer without purification or charity from Ghulul
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।