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सुनन नसाई

नंबर 2502

नंबर 2502किताब 23, नंबर 68
أَخْبَرَنَا قُتَيْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، قَالَ فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم زَكَاةَ رَمَضَانَ عَلَى كُلِّ صَغِيرٍ وَكَبِيرٍ حُرٍّ وَعَبْدٍ وَذَكَرٍ وَأُنْثَى صَاعًا مِنْ تَمْرٍ أَوْ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ ‏.‏
It was narrated that Ibn 'Umar said:"The Messenger of Allah enjoined the Zakah of Ramadan on everyone, young and old, free and slave, male and female, a Sa of dates or a Sa of barley
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।