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सुनन नसाई

नंबर 2483

नंबर 2483किताब 23, नंबर 49
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ الْمُبَارَكِ، قَالَ حَدَّثَنَا وَكِيعٌ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ بْنِ أُمَيَّةَ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ، عَنْ يَحْيَى بْنِ عُمَارَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لَيْسَ فِيمَا دُونَ خَمْسَةِ أَوْسَاقٍ مِنْ حَبٍّ أَوْ تَمْرٍ صَدَقَةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated the Abu Sa'eed Al-Khudri said:"The Messenger of Allah said: There is no Sadaqah on less than five Awsaq of grains or dates
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।