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सुनन नसाई

नंबर 2478

नंबर 2478किताब 23, नंबर 44
أَخْبَرَنَا حُسَيْنُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا ابْنُ نُمَيْرٍ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، عَنْ أَبِي إِسْحَاقَ، عَنْ عَاصِمِ بْنِ ضَمْرَةَ، عَنْ عَلِيٍّ، رضى الله عنه قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ قَدْ عَفَوْتُ عَنِ الْخَيْلِ وَالرَّقِيقِ وَلَيْسَ فِيمَا دُونَ مِائَتَيْنِ زَكَاةٌ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Ali, may Allah be pleased with him, said:"The Messenger of Allah said: 'I have exempted you from (having to pay Zakah on) houses and slaves, and there is no Zakah on less than two hundred (Dirhams)
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।