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सुनन नसाई

नंबर 2468

नंबर 2468किताब 23, नंबर 34
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَلِيِّ بْنِ حَرْبٍ الْمَرْوَزِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحْرِزُ بْنُ الْوَضَّاحِ، عَنْ إِسْمَاعِيلَ، - وَهُوَ ابْنُ أُمَيَّةَ - عَنْ مَكْحُولٍ، عَنْ عِرَاكِ بْنِ مَالِكٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ لاَ زَكَاةَ عَلَى الرَّجُلِ الْمُسْلِمِ فِي عَبْدِهِ وَلاَ فَرَسِهِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah said: 'A Muslim man does not have to pay Zakah on his slave or his horse
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · The Book of Zakah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।