أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُثْمَانَ بْنِ أَبِي صَفْوَانَ الثَّقَفِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو عَوَانَةَ، عَنِ الْحُرِّ بْنِ الصَّيَّاحِ، عَنْ هُنَيْدَةَ بْنِ خَالِدٍ، عَنِ امْرَأَتِهِ، عَنْ بَعْضِ، أَزْوَاجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَصُومُ الْعَشْرَ وَثَلاَثَةَ أَيَّامٍ مِنْ كُلِّ شَهْرٍ الاِثْنَيْنِ وَالْخَمِيسَ .
It was narrated from Hunaidah bin Khalid, from his wife, that one of the wives of the Prophet said:"The Prophet used to fast the ten (days), and three days of each month: Monday and Thursday
स्रोत में दर्ज दर्जे
SahihAbu Ghuddah
SahihAl-Albani
HasanZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।