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सुनन नसाई

नंबर 2306

नंबर 2306किताब 22, नंबर 217
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ سَلَمَةَ، قَالَ أَنْبَأَنَا ابْنُ الْقَاسِمِ، قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ، عَنْ هِشَامِ بْنِ عُرْوَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنَّ حَمْزَةَ قَالَ لِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَا رَسُولَ اللَّهِ أَصُومُ فِي السَّفَرِ وَكَانَ كَثِيرَ الصِّيَامِ ‏.‏ فَقَالَ لَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنْ شِئْتَ فَصُمْ وَإِنْ شِئْتَ فَأَفْطِرْ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated that 'Aishah said:"Hamzah said to the Messenger of Allah: 'O Messenger of Allah, should I fast while traveling?' He used to fast a great deal. The Messenger of Allah said to him: "If you wish then fast and if you wish then do not fast
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih BukhariZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।