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सुनन नसाई

नंबर 2265

नंबर 2265किताब 22, नंबर 176
أَخْبَرَنَا عِمْرَانُ بْنُ يَزِيدَ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ شُعَيْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي الأَوْزَاعِيُّ، عَنْ يَحْيَى، أَنَّهُ حَدَّثَهُ عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، قَالَ بَيْنَمَا رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَتَغَدَّى بِمَرِّ الظَّهْرَانِ وَمَعَهُ أَبُو بَكْرٍ وَعُمَرُ فَقَالَ ‏ "‏ الْغَدَاءَ ‏"‏ ‏.‏ مُرْسَلٌ ‏.‏
It was narrated that Abu Salamah said:"When the Messenger of Allah was eating breakfast in Marr Az-Zahran, and Abu Bakr and 'Umar were with him, he said: '(Come and eat) breakfast." (Daif) He narrated it in Mursal form
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih LighairihiAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।