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सुनन नसाई

नंबर 2154

नंबर 2154किताब 22, नंबर 65
أَخْبَرَنَا عَمْرُو بْنُ عَلِيٍّ، قَالَ حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ فُضَيْلٍ، قَالَ حَدَّثَنَا أَبُو يَعْفُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، عَنْ صِلَةَ بْنِ زُفَرَ، قَالَ تَسَحَّرْتُ مَعَ حُذَيْفَةَ ثُمَّ خَرَجْنَا إِلَى الْمَسْجِدِ فَصَلَّيْنَا رَكْعَتَىِ الْفَجْرِ ثُمَّ أُقِيمَتِ الصَّلاَةُ فَصَلَّيْنَا ‏.‏
It was narrated that Silah bin Zufar said:"I had Sahur with Hudhaifah, then we went out to the Masjid. We prayed the two Rakahs of Fajr, then the Iqamah for prayer was made, and we prayed
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 22 · The Book of Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।