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सुनन नसाई

नंबर 2056

नंबर 2056किताब 21, नंबर 239
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الرَّحْمَنِ، عَنْ سُفْيَانَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنْ خَيْثَمَةَ، عَنِ الْبَرَاءِ، قَالَ ‏{‏ يُثَبِّتُ اللَّهُ الَّذِينَ آمَنُوا بِالْقَوْلِ الثَّابِتِ فِي الْحَيَاةِ الدُّنْيَا وَفِي الآخِرَةِ ‏}‏ قَالَ نَزَلَتْ فِي عَذَابِ الْقَبْرِ ‏.‏
It was narrated that:Al-Bara said about Allah will keep firm those who believe, with the word that stands firm in this world and in the Hereafter "It was revealed concerning the torment of the grave
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih MuslimZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।