सीधे कंटेंट पर जाएँ
सुनन नसाई

नंबर 2004

नंबर 2004किताब 21, नंबर 187
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ مَنْصُورٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنَا الأَسْوَدُ بْنُ قَيْسٍ، عَنْ نُبَيْحٍ الْعَنَزِيِّ، عَنْ جَابِرِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، ‏:‏ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم أَمَرَ بِقَتْلَى أُحُدٍ أَنْ يُرَدُّوا إِلَى مَصَارِعِهِمْ، وَكَانُوا قَدْ نُقِلُوا إِلَى الْمَدِينَةِ ‏.‏
It was narrated from Jabir bin 'Abdullah:That the Prophet commanded that those who had been killed at Uhud should be taken back to the place where they fell; they had been brought to Al-Madinah
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।