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सुनन नसाई

नंबर 1994

नंबर 1994किताब 21, नंबर 177
أَخْبَرَنَا نُوحُ بْنُ حَبِيبٍ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ أَنْبَأَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ الْمُسَيَّبِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ مَنْ صَلَّى عَلَى جَنَازَةٍ فَلَهُ قِيرَاطٌ وَمَنِ انْتَظَرَهَا حَتَّى تُوضَعَ فِي اللَّحْدِ فَلَهُ قِيرَاطَانِ وَالْقِيرَاطَانِ مِثْلُ الْجَبَلَيْنِ الْعَظِيمَيْنِ ‏"‏ ‏.‏
(It was narrated that Abu Hurairah said:"The Messenger of Allah said: 'Whoever offers the funeral prayer will have one Qirat and whoever stays until )the body) is placed in the Lahd will have two Qirats, and the two Qirats are like two great mountains
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।