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सुनन नसाई

नंबर 1970

नंबर 1970किताब 21, नंबर 153
أَخْبَرَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عُبَيْدٍ، عَنْ حَفْصِ بْنِ غِيَاثٍ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنْ عَطَاءٍ، عَنْ جَابِرٍ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ أَخَاكُمُ النَّجَاشِيَّ قَدْ مَاتَ فَقُومُوا فَصَلُّوا عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏ فَقَامَ فَصَفَّ بِنَا كَمَا يُصَفُّ عَلَى الْجَنَازَةِ وَصَلَّى عَلَيْهِ ‏.‏
It was narrated from Jair that:the Messenger of Allah said: "Your brother An-Najashi has died, so get up and offer the funeral prayer for him." He stood up and put us in rows as is done for the funeral prayer, and we prayed for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।