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सुनन नसाई

नंबर 1959

नंबर 1959किताब 21, नंबर 142
أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ الأَنْصَارِيِّ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ يَحْيَى بْنِ حَبَّانَ، عَنْ أَبِي عَمْرَةَ، عَنْ زَيْدِ بْنِ خَالِدٍ، قَالَ مَاتَ رَجُلٌ بِخَيْبَرَ فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ صَلُّوا عَلَى صَاحِبِكُمْ إِنَّهُ غَلَّ فِي سَبِيلِ اللَّهِ ‏"‏ ‏.‏ فَفَتَّشْنَا مَتَاعَهُ فَوَجَدْنَا فِيهِ خَرَزًا مِنْ خَرَزِ يَهُودَ مَا يُسَاوِي دِرْهَمَيْنِ ‏.‏
It was narrated that Zaid bin Khalid said:"A man died at Khaibar and the Messenger of Allah said: 'Pray for your companion; he stole from the spoils war.' We inspected his luggage and fund some of the beads of the Jews that were not even worth two Dirhams
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • DaifAbu Ghuddah
  • DaifAl-Albani
  • Isnaad HasanZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।