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सुनन नसाई

नंबर 1929

नंबर 1929किताब 21, नंबर 112
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ، قَالَ أَنْبَأَنَا النَّضْرُ، قَالَ حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ سَلَمَةَ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ جَنَازَةً، مَرَّتْ بِرَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم فَقَامَ فَقِيلَ إِنَّهَا جَنَازَةُ يَهُودِيٍّ ‏.‏ فَقَالَ ‏ "‏ إِنَّمَا قُمْنَا لِلْمَلاَئِكَةِ ‏"‏ ‏.‏
It was narrated from Anas that:a funeral passed by the Messenger of Allah and he stood up. It was said: "It is the funeral of a Jew." He said: "We stood up for the angels
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • Sahih IsnaadAbu Ghuddah
  • Sahih IsnaadAl-Albani
  • DaifZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।