أَخْبَرَنَا يُوسُفُ بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا حَجَّاجٌ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، عَنِ ابْنِ عَجْلاَنَ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، وَأَبِي، سَعِيدٍ قَالاَ مَا رَأَيْنَا رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم شَهِدَ جَنَازَةً قَطُّ فَجَلَسَ حَتَّى تُوضَعَ .
It was narrated that Abu Hurairah and Abu Sa'eed said:"We never saw the Messenger of Allah attend any funeral where he sat down until (the body) was placed (in the grave)
स्रोत में दर्ज दर्जे
Hasan IsnaadAbu Ghuddah
Hasan IsnaadAl-Albani
SahihZubair Ali Zai
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।