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सुनन नसाई

नंबर 1857

नंबर 1857किताब 21, नंबर 40
أَخْبَرَنَا عَبْدُ الْجَبَّارِ بْنُ الْعَلاَءِ بْنِ عَبْدِ الْجَبَّارِ، عَنْ سُفْيَانَ، قَالَ قَصَّهُ لَنَا عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ أَبِي مُلَيْكَةَ، يَقُولُ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ قَالَتْ عَائِشَةُ إِنَّمَا قَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ إِنَّ اللَّهَ عَزَّ وَجَلَّ يَزِيدُ الْكَافِرَ عَذَابًا بِبَعْضِ بُكَاءِ أَهْلِهِ عَلَيْهِ ‏"‏ ‏.‏
Ibn 'Abbas said:"Aishah said: Rather the Messenger of Allah said: 'Allah, the Mighty and Sublime increases the punishment of the disbeliever due to some of his family's weeping for him
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Sahih - Agreed UponZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।