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सुनन नसाई

नंबर 1844

नंबर 1844किताब 21, नंबर 27
أَخْبَرَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، قَالَ أَنْبَأَنَا عَبْدُ الرَّزَّاقِ، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنْ ثَابِتٍ، عَنْ أَنَسٍ، أَنَّ فَاطِمَةَ، بَكَتْ عَلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَ مَاتَ فَقَالَتْ يَا أَبَتَاهُ مِنْ رَبِّهِ مَا أَدْنَاهُ يَا أَبَتَاهُ إِلَى جِبْرِيلَ نَنْعَاهُ يَا أَبَتَاهُ جَنَّةُ الْفِرْدَوْسِ مَأْوَاهُ ‏.‏
It was narrated from Anas that Fatimah wept for the Messenger of Allah when he died. She said:"O my father, how close he is now to his Lord! O my father, we announce the news (of his death) to Jibril! O my father, Jannat Al-Firdawas is now his abode
स्रोत में दर्ज दर्जे
  • SahihAbu Ghuddah
  • SahihAl-Albani
  • Isnaad SahihZubair Ali Zai

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 21 · The Book of Funerals

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।